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सुप्रीम लीडर की ज़बानीः समाज में औरत का अहेम रोल औरत के विषय को आज की दुनिया का एक महत्वपूर्ण विषय कहना चाहिये जो हर मुल्क, हर कल्चर, हर सुसॉईटी का विषय है लेकिन अफ़सोस की बात है कि आज तक किसी भी मुल्क और सुसॉइटी में इस विषय पर इस तरह बात नहीं की गई और उसे इस तरह बयान नहीं किया गया जो उसका अधिकार था.........
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इस्लामी जगत और महिला अधिकार मानव समाज की आधी जनसंख्या के रूप में महिला को यद्यपि विदित रूप से दृष्टिगत रखा गया है तथा उनके अधिकारों और स्थान के बारे में बातें की जाती हैं.....
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विश्व की महिलाएं और विभिन्न विकल्प इस समय महिलाएं सुरक्षित जीवन की दृष्टि से अतीत की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। इस समय महिलाएं आर्थिक क्षेत्रों में उन्हें उचित शिक्षा सुविधा प्राप्त है...
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पर्दा ही नारी की सुंदरता है भारतीय नारी तो नारीत्व का, ममता का, करुणा का मूर्तिमान रूप है और पश्चिम कि सभ्यता औरत को एक नुमाइश कि चीज़ समझती है. ....
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हज़रत अली (अ) और कूफे के अनाथ एक दिन हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने देखा कि एक औरत अपने कंधे पर पानी की मश्क उठाए हुए ले जा रही है आपने इस औरत से मश्क ले ली और मश्क उसके घर पहुंचा दी. पानी की मश्क उसके घर तक पहुंचाने के बाद आपने उसका हाल चाल भी पूछा.
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वर्ष 2010 और महिलाएं वर्ष 2010 भी विभिन्न उतार चढ़ाव के साथ समाप्त हो गया। इस वर्ष भी विश्व की आधी जनसंख्या के रूप में महिलाएं, विभिन्न मामलों में उलझी रहीं जिनमें से कुछ उनसे विशेष थे। इस कार्यक्रम में हम पिछले वर्ष 2010 में महिलाओं और परिवार के विभिन्न मामलों पर एक दृष्टि डालने जा रहे हैं।
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इतिहास रचने वाली कर्बला की महिलाएं बहुत से महापुरुष और वे लोग जिन्होंने इतिहास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उनकी सफलता के पीछे दो प्रकार की महिलाओं का बलिदान और त्याग रहा है। पहला गुट उन मोमिन और बलिदानी माताओं का है जो इस प्रकार के बच्चों के पालन पोषण में सफल हुईं। दूसरा गुट उन महिलाओं का है जो अपने पति के कांधे से कांधा मिलाकर कठिन से कठिन घटनाओं के समक्ष डट गयीं। इस प्रकार से घटना के पीछे या विभिन्न मंचों पर परोक्ष रूप से महिलाओं की भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती
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